ईमानदारी को नतमस्तक किया(bow down to honesty)💐
बात उन दिनों की है ।जब मेरी नियुक्ति एक शिक्षक के रूप में दूर के जंगलों के मध्य बसा गांव का पाठ पढ़ा में हुई थी। वहां रास्ता उबर खाबर था । पत्थरों से भरा हुआ था ।और रास्ते में चोर लुटेरों का भी भय था ।उस बीच में ही सगाई हुई थी ।निशानी केरु पर मेरे पास एक सोने की अंगूठी थी। मैं गांव जाने से पहले शहर छिंदवाड़ा से बारिश के पूरे इंतजाम के लिए एक बोरी चावल खरीद पर साइकिल के पीछे बांध लिया। रास्ते में चोरों का ध्यान आया तो अंगूठी उतार कर चावल की बोरी में डाल दी शाम ढलते ढलते ।मैं अपने निवास पर जैसे कैसे साइकिल से उतर कर देखा तो बोरी नहीं थी। वह रास्ते में गिर गई थी ।इसलिए मैंने उसे तलाशने को ठीक नहीं समझा रात भर नींद नहीं। आई हल्की सी सुबह झपकी लगी थी ।किसी ने गेट खटखटाया तो सामने देखा कि गांव का एक गंगा राम नाम का एक लड़का था। उन्होंने बोला गुरु जी आपके चावल की बोरी शायद रास्ते में गिर गई थी। हमारे गांव में कोई बासमती चावल नहीं खाता है। लेकिन मुझे आपके बारे में पता था। कि आप ही खाते हैं ।बोरी उतारते हुए मैंने उसे कहा जानते हो गंगाराम यह सिर्फ बोरी नहीं ।इसके अंदर मेरी सगाई की अंगूठी भ...