Best Latest story in Hindi सत आगस्टाइन
अफ्रीका में जन्मे एक अगस्टाइन जन्मजात प्रतिभाशाली थे। उच्च शिक्षा पाने के बाद वह है ।अमेरिका की मिलान यूनिवर्सिटी में शिक्षक पद पर कार्यरत हो गए ।खाओ पियो मौज करो सिद्धांत में विश्वास करते थे। एक रोज का है। पादरी इसबगोल के सत्संग में गए। मनुष्य को सत्य अहिंसा योन वाज का दंड ही पड़ता है। इस वाक्य को सुनकर उनके मन में हलचल होने लगी। और वे शिक्षक पद से त्यागपत्र दे दिया। और अफ्रीका लौट आए अपने जीवन की सारी पूंजी उन्होंने गरीबों में दान कर दी संत बन गए।आगस्टाइन ने "द सिटीआफ गाड" पुस्तक लिखी उन्होंने लिखा ईश्वर प्रकाश दिव्यानंद है। जो शुभ है। उससे वह प्रेम करता है ।जब आत्मा अपने आप को ईश्वर में समर्पित कर देती है। संत अगस्टाइन ने ईशा के उपदेश का पालन करते हुए अपने जीवन में किए गए ।पाप कर्मों और अनाचार को सार्वजनिक रूप से बेपर्दा कर पश्चाताप किया। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की। हे प्रभु अहंकार और संघ में फंसकर किया गया। दुष्कर्म की क्षमा मांगते हुए आप की शरण में हूं। संपत्ति को अपना मान कर दुरुपयोग करता रहा आप की असीम कृपा से ही जीवन से विरत हो पाया हो आगे चलकर आनस्टाइन की गणना...