Bast moral story in Hindi 2021
वह सच या यह सच? मिथिला नरेश महाराज जनक अपने राजभवन में शयन कर रहे थे। उन्होंने एक अद्भुत स्वपन देखा कि मिथिला पर किसी शत्रु ने आक्रमण कर दिया है ।संग्राम छिड़ गया है। मिथिला की सेना पराजित हो गई है। जनक बंदी हुए विजय शत्रु ने आज्ञा दी। मैं तुम्हारे प्राण नहीं लेता किंतु अपने वस्त्र आभूषण उतार दो ।और इस राज्य से निकल जाओ साथ ही घोषणा करा दी जनक को जो आश्रया या भोजन देगा उसे प्राण दंड दिया जाएगा । राजा जनक सादे वस्त्रों में राजभवन से निकल पड़े प्राण भय से कोई उनसे बोला तक नहीं था। चलते-चलते पैरों मे छाले पड़ गए ।कई दिनों तक एक दाना पेट में नहीं गया ।जनक अब राजा नहीं है। बिखरे केश धूल से भरा शरीर दुख से अत्यंत व्याकुल जनक एक भिखारी जैसे थे। राज्य से बाहर एक नगर मिला पता लगा ।कि वही कोई अन्य क्षेत्र है जिसमेंभूखों को खिचड़ी दी जाती है । बड़ी आशा से जनक वहां पहुंचे किंतु खिचड़ी बढ़ चुकी थी ।बांटने वाला द्वार बंद करने जा रहा था। भूख से चक्कर खाकर जनक बैठ गया ।और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे ।अनन बांटने वाले कर्मचारियों को उनकी दशा पर दया आ गई ।उस...