नई शुरुआत और सकारात्मक सोच (Fresh start and positive thinking)
एक मेरा मित्र वीर था। किसी पारिवारिक विवाद के बाद बहुत कम उम्र में ही माता-पिता का घर छोड़ना पड़ा था। बहुत संघर्षों के बाद वे अपने पैरों पर खड़े हुए विवाह किया ।घर गृहस्ती बसाई। खूब नाम कमाया पैसा कमाया बड़ा बंगला बना गाड़ियों का जखीरा भी ।एक नया व्यापार शुरू किया ।परंतु नए व्यापार में दोनों पार्टनर धोखेबाज निकली। विर का कमाया हुआ ।लाखों रुपए डूब गया। गाड़ियां बिक गई। उस पर कोरोना की मार अलग मैंने महसूस किया। कि जिन हालातों में बड़े-बड़े लोग डगमगा जाए। उनका सामना करते हुए ।वीर परेशान नहीं थे ।एक दिन अचानक बाजार में एक दुकान के सामने वीर मुझे मिल गए। मैंने देखा वह कुछ गुनगुना रहे थे ।खुश भी थे ।मैंने ऐसे ही पूछ लिया ।अरे आप इधर कैसे और वह भी पैदल इस दुकान से कल कुछ सामान ले गया था ।दुकानदार ने मुझे कुछ रुपए ज्यादा लौटा दिए थे ।बस वही वापस करने चला आया। उन्होंने कहा क्या आप सिर्फ रुपए लौटाने इतनी दूर आए। मैं आशचर्यकित थी। और क्या कह कर वे मुस्कुराए बहुत बड़ी बात है। इतना सब खोकर आप दुखी नहीं है ।वीर मैं उनकी स्थिति को याद कर बोली दुख किस बात का वीर ने कहा इतनी ऊंचाई पर पहुंच क...