Posts

किस ने तय किया

Image
अंदर आए तो सुधा ने आवाज लगाई। अब क्या हुआ ।किस लिए बुला रही हो ।या अलमारी खोल दीजिए। संतोष जी ने ऊपर के अलमारी खोली। उसमें कई सारे डिबे करीने से जमे हुए थे ।सब के ऊपर लेवल लगे हुए थे ।अभी क्या करना है।  उन्होंने पूछा यह देखिए। इसमें   चावला इसमें दलिया है ।यह सारी दालें है ।इसमें यह है इसमें वह हो यह तुम को क्या हो गया है ।आजकल तुम रोज मुझे किचन में बुला रही हो ।और जिस तरह से सब दिखा रही हो समझ नहीं आ रहा है। यह सब क्या है। मैं बच्चा नहीं हूं। लेकिन आपको यह जानना जरूरी है। कि कहां पर क्या चीज रखी हुई है ।नहीं तो आप परेशान हो जाएंगे। परेशान हो जाऊंगा। मतलब मतलब यह है  कि  सुधा बोली पिछले सप्ताह से आप रोज अलमारी खोलकर एक एक फाइल निकालकर मुझे दिखाते हो। यह देखो यह पेंशन के पेपर है। यह देखो एक एफडी है ।यह सारी पासबुक है ।मेडिकल के पेपर है ।या फिर अपना खाता है ।इस बैंक में लिविंग सर्टिफिकेट जमा होते हैं ।यहां पर यह है । यहां पर वह है ।1 सप्ताह से आपका दिखाया समझाया समझ रही हूं ।इसलिए आपको किचन का जानना भी उतना ही जरूरी है ।जितना मुझे अभी फाइलों को ...

interest targeted(रुचि को लक्ष्य बनाया)💐

Image
बचपन की बात कर रहा हूं ।मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर बालाघाट में हम सभी परिवार सहित किराए के मकान में रहा करते थे। सादा जीवन था। पिताजी ग्रामीण परिवेश से थे। शासकीय सेवा में आने के पूर्व उन्होंने जबलपुर में काफी मुश्किल हालात में पढ़ाई लिखाई की ।और साथ ही वे पार्ट टाइम जॉब भी करते थे । हम भाई बहनों को  अपने उन दिनों के बारे में बताया करते। यह भी कहते हैं। बिना मेहनत के लिए कुछ नहीं मिलता। अपने जीवन में कुछ बनना चाहते हो तो कंफर्ट जोन से बाहर निकलो। जैसे मैं गांव से निकलकर शहर आया। मेहनत की पढ़ाई की काम किए ।तब कहीं जाकर आज यहां हूं पिताजी बहुत संघर्षों के बाद ही नौकरी पर आ सके थे।  हम सभी भाई बहनों को मिलाकर 8 सदस्य परिवार में थे ।क्योंकि पिताजी शिक्षा के क्षेत्र में थे। जो परिवार में अनुशासन बहुत था। अपने छात्रों को बहुत अनुशासित रखा करते। और घर पर अनेकानेक छात्रों को निशुल्क पढ़ाया करते। हम सभी भाई बहनों ने सरकारी स्कूलों में अध्ययन किया। और पैदल ही हम सभी अपने अपने विद्यालय शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते थे। पिताजी के पास है । साइकिल थी। जब अपनी ड्यूटी से वापस...

दिल से दुआएं दी

Image
बात 3 साल पहले की है मुझे मेरी बहन के नए घर के मुहूर्त पर मुंबई जाना था। हमारे तीन टिकट कंफर्म भी हो चुके थे। निश्चित तारीख को मैं और मेरे दोनों बेटे घर से रवाना होकर रेलवे स्टेशन समय से पहले ही पहुंच गए थे। अपने डिब्बे के नंबर के सामने प्लेटफार्म पर हम ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे थे। उसी दौरान मेरे बेटे ने मुझे एयरफोन मांगी मैंने अपने पर्स में ढूंढते हैं।  सारा सामान बाहर निकालकर इयरफोन निकाल ले ।और उसे दे दिए इतने में ट्रेन आ गई। जल्दबाजी में मैंने पर्स में फटाफट सामान वापस डाल  और हम ट्रेन में चढ़ गए। थोड़ी देर से ही ट्रेन रवाना हो गई। रवाना होती मैंने बहन को फोन पर बता दिया। मन में बड़ी खुशी साथी मुंबई जाने की बीच रास्ते में हमने खाना खाया और अंताक्षरी खेलने लगे थोड़ी देर में टीसी आया।और उसने त टिकट दिखाने को कहा।  मैंने पर्स में ढूंढा लेकिन जिस छोटे पर्स में मैंने टिकट रखा था। वह मिली नहीं रहा था। मुझे परेशान देखकर टीटी बोला आप टिकट निकालकर है। कि मैं वापस आता हूं ।मुझे बहुत टेंशन हो रहा था। सब सामान निकाल कर देख लिया। टिकट वाला पारस हीं नहीं  मिल ...

टोपीवाला और बंदर

Image
बहुत दिन पहले एक गांव में एक टोपी वाला रहता था ।वह गांव -गांव और शहर -शहर घूम करे रंग बिरंगी टोपिया बेचा करता था ।1 दिन वह एक गांव की ओर जा रहा था ।रास्ते में घना जंगल पड़ा टोपीवाला बहुत थका हुआ था । थोड़ी दूर पर उसे पेड दिखाई दिया ।उसने सोचा कि थोड़ी देर इस पेड़ के नीचे आराम कर लेता हूं ।वह अपनी टोपी की टोकरी पेड़ के नीचे रखकर सो गया ।उस पेड़ पर बहुत सारे बंदर बैठे थे। उन्होंने सारी टोपी इधर-उधर फैला दी।  रंग बिरंगी तोपों से खेलने लगे उनके शोर से टोपीवाला जाग गया। उसने देखते बंदर की सारी टोपिया लेकर पेड़ पर चढ़ गए  ।देखकर टोपी वाले को बहुत गुस्सा आया। उसने गुस्से में आकर नीचे गिर एक फल को उठा कर उन पर फेंक दिया। बंदर भी फौरन पेड़ से फल तोड़कर टोपी वाले पर फेंकने लगे ।अभी टोपी वाले को एक उपाय सूझा उसने एक टोपी उठाकर पहन ली।  बंदरों ने उसकी नकल उतारते हुए वैसा ही किया। टोपी वाले ने अपनी टोपी उतारकर टोकरी में फेंक दी। यह देखकर बंदरों ने भी अपनी अपनी टोपी उतारो नीचे फेंक दी ।टोपी वाले ने झट से सारी टोपिया उठाकर टोकरी में डाल दी। और खुशी-खु...

नन्हा पौधा( little plant)💐

Image
एक गांव में रामदास नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसने एक आम का बगीचा लगाया ।वह सारे दिन उसने मेहनत करता था। पौधों की कटाई छटाई करता था। और पेड़ों से आम इकट्ठा करता था। उसने एक छोटा सा नन्हा पौधा लगा।या और उसके चारों और पतली तारों की बाड़ लगा दी। पौधे के आसपास कहीं पुराने पेड़ थे ।पेड़ का भी समय से फल दे रहे थे ।उनमें एक पेड़ रामदास को नया पौधा लगाते हुए देख रहा था ।और वह खुश था। नन्हे पौधे के आने से पौधा भी छोटा था।  पेड़ के मन में चिंता थी। रामदास के जाने के बाद पेड़ पौधे से बोला इस बाग में तुम्हारा स्वागत है ।परंतु पौधे ने कोई उत्तर नहीं दिया। पेड़ फिर बोला मैं यहां कई सालों से हूं तुम अभी छोटे हो अपना ख्याल रखना। लेकिन पौधे गुस्से से बोला यहां भला कोई कैसे खुश रह सकता है ।उस व्यक्ति ने मुझे इस बाड  में कैद कर दिया है। आजाद रहना चाहता हूं। मुझे बाहर निकालो यहां से। पेड बोला अरे यार तुम क्या कर रहे हो  ।तुम अभी बहुत छोटे हो तुम्हारी रक्षा के लिए ही तुम्हें बाढ़ में रखा है। और फिर बोला मैं अपनी रक्षा खुद कर सकता हूं ।हां तुम तो आजाद हो अपनी मर्जी से झ...