दिल से दुआएं दी
बात 3 साल पहले की है मुझे मेरी बहन के नए घर के मुहूर्त पर मुंबई जाना था। हमारे तीन टिकट कंफर्म भी हो चुके थे। निश्चित तारीख को मैं और मेरे दोनों बेटे घर से रवाना होकर रेलवे स्टेशन समय से पहले ही पहुंच गए थे। अपने डिब्बे के नंबर के सामने प्लेटफार्म पर हम ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे थे। उसी दौरान मेरे बेटे ने मुझे एयरफोन मांगी मैंने अपने पर्स में ढूंढते हैं।
सारा सामान बाहर निकालकर इयरफोन निकाल ले ।और उसे दे दिए इतने में ट्रेन आ गई। जल्दबाजी में मैंने पर्स में फटाफट सामान वापस डाल और हम ट्रेन में चढ़ गए। थोड़ी देर से ही ट्रेन रवाना हो गई। रवाना होती मैंने बहन को फोन पर बता दिया। मन में बड़ी खुशी साथी मुंबई जाने की बीच रास्ते में हमने खाना खाया और अंताक्षरी खेलने लगे थोड़ी देर में टीसी आया।और उसने त टिकट दिखाने को कहा।
मैंने पर्स में ढूंढा लेकिन जिस छोटे पर्स में मैंने टिकट रखा था। वह मिली नहीं रहा था। मुझे परेशान देखकर टीटी बोला आप टिकट निकालकर है। कि मैं वापस आता हूं ।मुझे बहुत टेंशन हो रहा था। सब सामान निकाल कर देख लिया। टिकट वाला पारस हीं नहीं मिल रहा था।इतने में ध्यान आया कि कहीं प्लेटफार्म पर बैग छूट तो नहीं गया ।फिर याद आया कि बेटे को ईयर फोन देते समय जब सामान निकाला तो वह छोटे र्हीं वही छूट गया होगा ।सोच रही थी। अब क्या होगा ।
टीटी आया ।और दोबारा टिकट दिखाने के लिए बोला मुझे और बच्चों को परेशान देखकर टीटी ने कारण पूछा। मैंने सब बात बताइए । कि जिस बैग मैं टिकट और कीमती सामान रखा था। वह मिली नहीं रहा है। टीटी जिस सब बात समझ गया।और वापस आने का कहकर चला गया ।थोड़ी देर जब टीटी आया तो वही बैग हमें देते हुए बोला क्या यही आपका बैग है मेरी तो जैसे जान में जान आ गई। मैं तुरंत बोली अरे आपके पास कैसे । टीटी ने बताया जब ट्रेन रवाना हो रही थी। तब वहां के सफाई कर्मचारी ने आकर यह बैग मुझे दिया । कि शायद किसी यात्री का बैग प्लेटफार्म पर रह गया है
आपको रास्ते में ऐसा लगे कि कोई इसके असली मालिक है ।तो आप उनको दे देना । आपको परेशान देखा तो लगा यह आपका ही होगा । बैग पा कर टीटी और उसे सफाई कर्मचारी के लिए धन्यवाद शब्द बहुत छोटा लग रहा था ।आज तक उन दोनों के लिए मन में दुआएं निकलती है कि ईश्वर उन्हें हमेशा स्वस्थ और खुश रखे।
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